मुर्गी पालन लोन योजना सरकार और विभिन्न बैंकों की एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के छोटे किसानों, युवाओं और महिलाओं को आर्थिक सहायता देकर उन्हें स्वरोजगार की ओर बढ़ाना है। इस योजना के तहत मुर्गी पालन यूनिट लगाने, बढ़ाने या आधुनिक बनाने के लिए आसान किस्तों पर लोन उपलब्ध कराया जाता है।
इस योजना से न सिर्फ कम पूंजी में कारोबार शुरू करने का मौका मिलता है, बल्कि अंडा उत्पादन, ब्रॉयलर फार्मिंग और देशी मुर्गी पालन जैसी गतिविधियों से हर महीने एक स्थिर आय भी बनाई जा सकती है।
आवेदन दोबारा शुरू, किसानों को बड़ा मौका
2025 में मुर्गी पालन लोन योजना के आवेदन फिर से शुरू हो गए हैं। बैंक और नाबार्ड के तहत मिलने वाला यह लोन अब अधिक सरल प्रक्रिया के साथ उपलब्ध है, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इसका फायदा उठा सकें।
नई गाइडलाइन के अनुसार आवेदनकर्ता को अब दस्तावेजों की लंबी प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ता। बैंक प्रोजेक्ट रिपोर्ट और दस्तावेजों की जांच के बाद 7 से 15 दिनों के भीतर लोन स्वीकृत कर सकते हैं।
कितनी मिलेगी लोन सहायता?
मुर्गी पालन लोन की राशि आवेदनकर्ता के प्रोजेक्ट के आकार पर निर्भर करती है। छोटे पैमाने पर यूनिट शुरू करने वालों को भी पर्याप्त राशि दी जाती है, वहीं व्यावसायिक स्तर पर यूनिट चलाने वालों को अधिक फंड उपलब्ध कराया जाता है।
25 से 500 चिकन यूनिट
ब्रॉयलर और लेयर यूनिट
देशी मुर्गी पालन यूनिट
फीड मशीन, शेड निर्माण और पानी की सुविधा
इन सभी गतिविधियों के लिए अलग-अलग लोन सीमा निर्धारित है। बैंक प्रोजेक्ट के अनुसार 50 हजार से लेकर 10 लाख रुपए तक का लोन प्रदान कर सकते हैं।
लोन पर सब्सिडी का लाभ
नाबार्ड के तहत कई राज्य मुर्गी पालन यूनिट पर सब्सिडी भी देते हैं। यह सब्सिडी 25% से 35% तक हो सकती है, और कुछ विशेष श्रेणी के लाभार्थियों जैसे महिला, SC/ST और पहाड़ी क्षेत्रों के निवासियों को अधिक सब्सिडी मिल सकती है।
सब्सिडी सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में जाती है, जिससे लोन की कुल लागत कम हो जाती है और प्रोफिट तेजी से बढ़ता है।
किसे मिलेगा लोन?
मुर्गी पालन लोन योजना को खास तौर पर उन लोगों के लिए बनाया गया है जो कृषि आधारित नया व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं।
18 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्ति
किसान, बेरोजगार युवा, महिलाएं
SHG समूह और छोटे व्यापारी
नये उद्यमी और ग्रामीण स्टार्टअप
इन सभी को लोन के लिए आवेदन करने की पात्रता दी गई है। किसी भी तरह का जमानत (collateral) छोटे प्रोजेक्ट में आवश्यक नहीं होता।
जरूरी दस्तावेज
लोन प्रक्रिया को सरल रखने के लिए न्यूनतम दस्तावेजों की जरूरत होती है। दस्तावेजों में आधार कार्ड, पैन कार्ड, फोटो, बैंक पासबुक और एक सरल प्रोजेक्ट रिपोर्ट शामिल है।
यदि आवेदनकर्ता के पास पहले से जमीन है, तो शेड उसी पर बन सकता है। किराए की जमीन होने पर भी बैंक प्रोजेक्ट को मंजूरी दे सकता है, लेकिन किराए का एग्रीमेंट आवश्यक होता है।
आवेदन प्रक्रिया कैसे करें?
मुर्गी पालन लोन योजना पर आवेदन करने के दो मुख्य तरीके हैं।
सबसे पहले नजदीकी बैंक जैसे SBI, PNB, BOI, या ग्रामीण क्षेत्र के बैंक में जाकर ऑफलाइन फॉर्म भरा जा सकता है। बैंक अधिकारी आपको प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनाने में भी मदद करते हैं।
दूसरा तरीका ऑनलाइन आवेदन का है, जहां किसान नाबार्ड और राज्य पशुपालन विभाग की वेबसाइटों पर जाकर योजना की जानकारी और आवश्यक फॉर्म डाउनलोड कर सकते हैं।
आवेदन जमा होते ही बैंक दस्तावेजों की जांच करता है और फील्ड वेरिफिकेशन के बाद लोन मंजूर कर देता है।
योजना से होने वाली कमाई
मुर्गी पालन सबसे तेजी से लाभ देने वाले व्यवसायों में से एक माना जाता है।
ब्रॉयलर यूनिट में 45 दिनों का उत्पादन चक्र होता है, जिसे पूरा होने पर तुरंत बाजार में बेचा जा सकता है।
अंडा उत्पादन में लगातार दैनिक आय मिलती रहती है।
देशी मुर्गी पालन में बाजार भाव अधिक होता है, जिससे अधिक मुनाफा मिलता है।
एक छोटे यूनिट से भी महीने के 18 हजार से 40 हजार रुपये तक की आय आसानी से बन जाती है।
निष्कर्ष
मुर्गी पालन लोन योजना उन लोगों के लिए एक बड़ा अवसर है जो कम लागत में अपने रोजगार की शुरुआत करना चाहते हैं। आसान प्रक्रिया, कम ब्याज दर, संभावित सब्सिडी और लगातार आय के अवसर इस योजना को बेहद आकर्षक बनाते हैं।
अगर आप भी अपना व्यवसाय शुरू करने की सोच रहे हैं, तो यह समय मुर्गी पालन के लिए लोन आवेदन करने का सबसे बेहतर मौका है।
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